ब्लिट्ज इंडिया की इस रिपोर्ट में आप जानेंगें कि पहाड़ जैसे भ्रष्टाचार

ब्लिट्ज ब्यूरो

ब्लिट्ज इंडिया की इस रिपोर्ट में आप जानेंगें कि पहाड़ जैसे भ्रष्टाचार से घिरे हाई कोर्ट जज यशवंत वर्मा इस्तीफ़ा न देने पर अभी भी डटे हुए हैं।
अब सरकार और संसद उन्हें महाभियोग के ज़रिए किस तरह से हटाकर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपनी मुहिम का एक क़ाबिल ए तारीफ़ उदाहरण पेश करेगी।
इस संबंध में देशवासियों की जानकारी रहना चाहिए कि जस्टिस यशवंत वर्मा के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पर विपक्षी दलों ने अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन और प्रमुख विपक्षी दलों ने सैद्धांतिक रूप से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सत्येन्द्र कुमार वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।
आपकी जानकारी के लिए जरूरी है कि संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। सरकार जब यह निर्णय ले लेगी कि यह प्रस्ताव संसद में लाया जाएगा, उसी समय सांसदों के हस्ताक्षर कराए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस प्रस्ताव को मानसून सत्र के शुरुआत में यानी 21 जुलाई तक पेश किए जाने की उम्मीद है।

देशवासियों की जानकारी में यह भी रहना चाहिए कि न्यायाधीश (जज) अधिनियम, 1968 के अनुसार, जब इस तरह का कोई प्रस्ताव किसी भी सदन में स्वीकार कर लिया जाता है, तो लोकसभा के अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति, जैसा मामला हो, तीन सदस्यीय समिति गठित करते हैं। ये सदस्य होते हैं – उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश, किसी एक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रमुख विधिवेत्ता। यह समिति न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट संबंधित सदन को सौंपती है।

आपको यह भी मालूम रहना चाहिए की महाभियोग की प्रक्रिया काफी लंबी होती है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही संसद के दोनों सदनों में इस पर बहस होती है।और दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से इसे पारित किया जाना आवश्यक होता है।

दोस्तों। आपकी जानकारी में रहना चाहिए की हाल ही में हुई विपक्षी नेताओं हुई बैठक में न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने पर चर्चा हुई थी। कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (उद्धव गुट), एनसीपी (शरद पवार गुट), वामपंथी दलों और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से समर्थन दिया है। विपक्ष को उम्मीद है कि कुछ अन्य दल और निर्दलीय सांसद भी इस प्रस्ताव के समर्थन में आ सकते हैं।

सरकार ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि यह प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाएगा या राज्यसभा में।

अब हम आपको बताते हैं की महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने की शुरुआत कैसे होती है और उसकी क्या प्रक्रिया है।

दोस्तों, न्यायाधीश (जज) अधिनियम, 1968 के अनुसार, जब किसी न्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव किसी भी सदन में स्वीकार कर लिया जाता है, तो अध्यक्ष या सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन-सदस्यीय समिति गठित करते हैं। तीनों सदस्य होते हैं- सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के एक मुख्य न्यायाधीश और एक प्रमुख विधिवेत्ता। समिति आरोपों की जांच करती है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर न्यायाधीश को हटाने (महाभियोग) की मांग की गई है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद संसद के दोनों सदनों में इसे दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक होता है। न्यायाधीशों, 25 न्यायमूर्ति मामलों में से किसी भी एक मामले में दोषी पाए जाने पर न्यायाधीश को ‘प्रतिष्ठा न्यायालय’ शामिल किया जाता है।

अब हम आपको जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले की याद दिलाते हैं कि इनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का क्या मामला है?
दोस्तों, इसी बीते मार्च में दिल्ली में न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना हुई थी और इसे बुरी तरह जले नोट पर गए एक वीडियो से जोड़ा गया। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में कई जले हुए नोटों को दिखाया गया। यह कहा गया कि यह रकम घूस के तौर पर ली गई थी। कोर्ट में लंबित एक याचिका में यह आरोप लगाया गया कि न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर आग अनियमित तौर पर हुई थी और उसे छिपाने की कोशिश की गई। न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंची है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और जांच के आदेश दिए गए। जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपों को सत्य पाया गया । और जस्टिस वर्मा से इस्तीफ़ा देने को कहा गया।लेकिन जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफ़ा नहीं दिया।
जस्टिस वर्मा के इस रुख़ को देखने के बाद ही सरकार और विपक्षी दलों के नेताओं ने जस्टिस वर्मा के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाकर उन्हें हटाने का फ़ैसला किया है।
अब, आगामी 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के सत्र में , जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग का प्रस्ताव राज्य सभा या लोक सभा में कभी भी लाया जा सकता है। सरकार की ओर से इसकी तैयारी पूरी है।
आपको ब्लिट्ज इंडिया की यह रिपोर्ट कैसी लगी कमेंट बॉक्स में लिखकर हमें जरूरत बताइयेगा। ताकि हम आपकी पसंद के मुताबिक जरूरी जानकारियां आप तक पहुचा सकें।

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